हरिद्वार उत्‍तराखण्‍ड

नेशनल हाईवे 74 पर मैक्स चालक हुए बे लगाम,यातायात नियमों की खुलेआम उड़ा रहे धज्जियां

हरिद्वार | नेशनल हाईवे 74 पर चंडीघाट हरिद्वार से लेकर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद तक दर्जनों की संख्या में दिन-रात दौड़ मैक्स वाहन चालक यातायात नियमों के पालन और आम आदमी की जान की सुरक्षा को लेकर रत्ती भर भी संवेदनशील नजर नहीं आ रहे हैं! बे लगाम हुए वाहन चालकों की लापरवाही लोगों की जान के लिए आफत बन रही है, आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं!

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 पर हरिद्वार से नजीबाबाद तक चलने वाली मैक्स सवारी गाड़ियों के चालक मोटी कमाई के चक्कर में मानक से अधिक सवारियों को गाड़ी में ठूंस ठूंस कर भरने के बाद कई कई लोगों को गाड़ियों के पिछले गेट पर लटका कर खुलेआम शान से इस रूट पर फर्राटा भर रहे हैं! इन ओवरलोड वाहनों के चालक और मालिक बे लगाम होकर खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं! इन्हें किसी की जान की कोई परवाह होना तो दूर बार-बार यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और कराने का दम भरने वाले परिवहन विभाग और यातायात पुलिस का भी रत्ती भर खौफ नहीं!

जानकारों के मुताबिक किसी भी वाहन की खिड़की अधिकतम 2 से 3 कब्जों के सहारे एक से डेढ़ इंच के पेचों की सहायता से वाहन से जुड़े होते हैं! अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस प्रकार के पेंच अधिकतम कितने वजन को सहन कर सकते हैं! और मैक्स वाहन चालक इसी खिड़की पर लगभग 60 से 70 किलो भार की चार चार सवारियों को लटका कर यातायात नियमों की बेखौफ धज्जियां उड़ाते हुए चंडीघाट से नजीबाबाद तक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी मात्र 40 से 45 मिनट के बीच तय कर रहे हैं! इस सब के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन है! इस सब से चिंतित सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल नें कुछ दिन पूर्व परिवहन विभाग के अधिकारियों से मिलकर इस प्रकार के ओवरलोड वाहनों पर लगाम लगाने के लिए ज्ञापन सौंपा, तो विभाग ने हरकत में आते हुए कार्यवाही के नाम पर थाना श्यामपुर से आगे ढाबे के पास सड़क पर कैमरे लगवा कर खानापूर्ति करते हुए अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली !

इसके अतिरिक्त आज तक भी कोई ठोस कार्यवाही ओवरलोड मैक्स चालकों के विरुद्ध होती नजर नहीं आई! आज भी मैक्स चालक बदस्तूर ओवरलोड सवारियां भरकर प्रशासनिक प्रबंधन को ठेंगा दिखाते हुए मनमाने तरीके से सवारियां भरकर बुलेट ट्रेन सरीखे तेज गति से राष्ट्रीय राजमार्ग पर फर्राटे भरते हुए संभावित सड़क हादसों को न्योता दे रहे हैं! नेशनल हाईवे के नजदीक पड़ने वाले स्कूल कॉलेजों से निकलने वाले छात्र-छात्राएं, दो पहिया सवार, वाहनों की इंतजार में सड़क और छोटे बस स्टैंडो पर खड़े यात्री, सड़क पार कर रहे आम लोग, जंगली जानवर आदि कोई भी इस रूट पर तेज गति से दौड़ रहे ओवरलोड मैक्स वाहन चालकों के द्वारा की जा रही लापरवाही की वजह से कब किस सड़क हादसे का शिकार होकर जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो जाए या अपनी जान गंवा बैठे कहा नहीं जा सकता! इन मैक्स चालकों के आगे ना तो पुलिस का जोर चल पा रहा है और ना ही जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का विरोध! इनकी तेज रफ्तार लोगों को डरा रही है, फिर भी इनकी स्थिति में कोई बदलाव आता दिखाई नहीं दे रहा! सोचने वाली बात यह है कि इनके सर पर किसका हाथ है, और किसके इशारे पर यह सब कुछ खुलेआम प्रशासन तंत्र से बेखौफ होकर इतनी निडरता से इस रूट पर अपनी मनमानी कर रहे हैं ?

उक्त सवाल के जवाब में सूत्रों कि यदि माने तो यहां कार्यवाही के नाम पर जेब भरने का काम चल रहा है! सूत्रों से प्राप्त जानकारी किए अनुसार ऐसा भी सुनने में आ रहा है कि यहां इस रूट पर ओवरलोड वाहनों और मैक्स चालको से वसूली किए जाने का खेल भी जोरों पर है! सूत्र बताते हैं कि यातायात विभाग, परिवहन विभाग एवं अन्य प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत होने के बाद ही इस प्रकार ओवरलोड वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं! एक मैक्स वाहन चालक ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि आरटीओ और संबंधित विभाग से बिना मिले काम नहीं चल सकता! पहचान के तौर पर सेटिंग वाले वाहन को एक कोड दिया जाता है, जो कि मनमाने तरीके से ओवरलोड सवारी बिना रोक-टोक यहां से वहां ले जाने के लिए मानो ग्रीन सिगनल होता है! या यूं कहें कि कोड धारक गाड़ी को चेकिंग के लिए नहीं रोका जाता, और यदि किसी कारणवश रोक भी लिया जाता है तो बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया जाता है! अब इस दावे में कितना दम है, यह दावा कितना सच्चा है अथवा कितना झूठा! इस बात से आम जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ता!

जनता पर फर्क पड़ता है तो सिर्फ और सिर्फ सड़कों पर अपनी और दूसरों की जान माल की सुरक्षा के सवाल पर! जिसको लेकर चिंतित क्षेत्रवासी समय-समय पर लिखित और मौखिक तरीके से इस रूट पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों और मैक्स चालकों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही किए जाने की मांग संबंधित विभाग सहित शासन प्रशासन से समय-समय पर लगातार करते चले आ रहे है! अब देखने वाली बात होगी कि इस मुद्दे पर शासन-प्रशासन की आंख कब तक खुलती हैं! या फिर यूं ही ऐसे वाहनों की मनमानी से खौफजदा क्षेत्रवासी सड़कों पर अपनी जान की सुरक्षा की सुरक्षा चिंता से भयभीत संभावित सड़क दुर्घटनाओं के खौफ के साए में भगवान भरोसे अपनी जिंदगी यूं ही गुजारते रहेंगे !

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